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एसजीएसआईटीएस के निजीकरण की कवायद पर गृहमंत्री बोले मैं ऐसा हर्गिज नहीं होने दूंगा

Deepak Sungra - indoreexpress.com 30-Aug-2019 09:08 pm

इंदौर. सरकारी क्षेत्र की प्रतिष्ठित इंजिनियरिंग संस्थान एसजीएसआईटीएस का निजीकरण किए जाने की कवायद पर मप्र के गृह मंत्री बाला बच्चन ने विराम लगा दिया है। शुक्रवार को इंदौर में गृह मंत्री ने कहा कि मेरे रहते एसजीआईटीएस का िनजीकरण नहीं हो सकता।

शुक्रवार को एसजीआईटीएस की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग के बाद गृह मंत्री ने मीडिया से कहा कि मैं स्वंय इस संस्थान का छात्र रहा हूं और मेरे रहते इसका निजीकरण नहीं हो सकता। गौरतलब है कि निजीकरण की सुगबुगाहट के चलते कॉलेज के छात्रों के साथ ही प्रोफेसरों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। छात्रों का कहना है जरूरत पड़ने पर आंदोलन करेंगे। 
सालाना 20 करोड़ की ग्रांट 
जानकारी के अनुसार एसजीएसआईटीएस को सालाना 20 करोड़ की ग्रांट अलग-अलग सोर्स से मिलती है, लेकिन निजीकरण होने की स्थिति में यह ग्रांट डूब जाएगी। संस्थान के 45 फीसदी तक खर्चे ठप हो जाएंगे। फिलहाल संस्थान को हर साल 10 करोड़ रुपए राज्य शासन की तरफ से ग्रांट मिलती है। जबकि पांच करोड़ रुपए की सालाना ग्रांट यूजीसी, एआईसीटीई, डीएसटी की तरफ से मिलती है। सालाना 5 करोड़ रुपए की ग्रांट तीन साल तक भारत सरकार की स्कीम से भी मिलेगी।

हर साल बढ़ाना होगी 10% तक फीस 
संस्थान हर 8 से 10 साल में 15 फीसदी तक फीस बढ़ाता है। 8 साल से फीस 45 हजार रुपए सालाना थी, जो पिछले सत्र से 67 हजार रुपए पहुंची है। 2010 के पहले तक फीस 30 हजार सालाना थी। विभाग का कहना है हर साल 10 फीसदी तक फीस बढ़ाना पड़ेगी, तभी खर्च वहन कर पाएंगे। संस्थान में 4550 छात्र पढ़ रहे हैं। 
यह है मामला 
वित्त विभाग ने एसजीएसआईटीएस व वैष्णव पॉलिटेक्निक कॉलेज के अनुदान को पांच साल में खत्म कर निजीकरण की सिफारिश की है। इसका पत्र उसने डीटीई को सौंपा था। डीटीई ने इसी पत्र की कॉपी दोनों संस्थानों को भी भेज दी।

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