किसी अपराध की जानकारी पुलिस तक पहुँचाने का पहला और सबसे ज़रूरी कदम है FIR, यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट। 1 जुलाई 2024 से देश में पुराने CrPC की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू है, जिसमें FIR से जुड़े कई अधिकार साफ़ तौर पर लिखे गए हैं।
FIR कब दर्ज होती है
चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी, लूट, हादसे में गंभीर चोट जैसे “संज्ञेय अपराधों” की सूचना मिलने पर पुलिस को FIR दर्ज करनी होती है। छोटे और “असंज्ञेय” मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज करके आगे की कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेजती है।
थाने में FIR दर्ज कराने का तरीका
- घटना वाले इलाके के थाने में जाएं और घटना की पूरी जानकारी लिखित या मौखिक रूप से दें: क्या हुआ, कब, कहाँ और किसने किया (अगर पता हो)।
- मौखिक जानकारी को पुलिस लिखेगी; दस्तख़त करने से पहले उसे पढ़कर या सुनकर ज़रूर जाँच लें।
- FIR की कॉपी मुफ़्त पाना आपका अधिकार है। कॉपी ज़रूर लें और FIR नंबर नोट कर लें।
“ज़ीरो FIR”: किसी भी थाने में
अगर अपराध किसी दूसरे थाना क्षेत्र में हुआ है, तब भी आप नज़दीकी किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकते हैं। इसे “ज़ीरो FIR” कहा जाता है। पुलिस इसे दर्ज करके संबंधित थाने को भेजती है। यह खासकर हादसों, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध और यात्रा के दौरान हुई घटनाओं में बहुत काम आता है।
ऑनलाइन शिकायत और e-FIR
BNSS में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी सूचना देने का प्रावधान है। ऐसी सूचना देने वाले व्यक्ति को तीन दिन के भीतर थाने जाकर उस पर दस्तख़त करने होते हैं। मध्य प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट (mppolice.gov.in) पर नागरिक सेवाओं के तहत ऑनलाइन शिकायत से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 या cybercrime.gov.in सबसे तेज़ माध्यम है।
अगर पुलिस FIR दर्ज न करे
- इंदौर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है। FIR दर्ज न होने पर संबंधित ज़ोन के वरिष्ठ अधिकारी (DCP) को लिखित शिकायत दें।
- डाक या ईमेल से भी वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी जा सकती है।
- इसके बाद भी सुनवाई न हो तो अदालत (मजिस्ट्रेट) में आवेदन किया जा सकता है।
कुछ ज़रूरी बातें
- झूठी FIR या झूठी सूचना देना ख़ुद एक अपराध है।
- घटना के सबूत, जैसे फ़ोटो, वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट या गवाहों के नाम, सुरक्षित रखें।
- FIR दर्ज होने के बाद जाँच की प्रगति की जानकारी लेने का अधिकार भी आपको है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। गंभीर मामलों में किसी वकील से सलाह ज़रूर लें।
