देश के ज़्यादातर हिस्सों में होली का रंग धुलेंडी के दिन उतर जाता है, लेकिन इंदौर में असली रंग होली के पाँच दिन बाद रंगपंचमी पर चढ़ता है। इस दिन पुराने इंदौर की सड़कों पर निकलने वाली गेर शहर का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव बन चुकी है।
गेर क्या है
गेर एक तरह का रंगारंग जुलूस है। ढोल-नगाड़ों, बैंड और झांकियों के साथ लोग टोलियों में निकलते हैं। पानी के टैंकरों और बड़ी मशीनों से रंग और गुलाल हवा में उड़ाया जाता है, जिससे राजवाड़ा और आसपास का पूरा इलाका रंगीन बादलों से ढक जाता है। इसमें लाखों लोग शामिल होते हैं और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने छतों और गलियों में जुटते हैं।
परंपरा कितनी पुरानी है
माना जाता है कि रंगपंचमी पर गेर निकालने की परंपरा होलकर राजवंश के समय से चली आ रही है, जब राजपरिवार भी प्रजा के साथ रंग खेलता था। समय के साथ शहर की कई संस्थाएं और संगठन अपनी-अपनी गेर निकालने लगे, और यह उत्सव आज इंदौर की सांस्कृतिक पहचान बन गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास भी होते रहे हैं।
गेर में जा रहे हैं? ये सावधानियां रखें
- मोबाइल और कीमती सामान: मोबाइल को वॉटरप्रूफ़ पाउच में रखें; गहने और कीमती चीज़ें घर पर छोड़ें।
- आँखों और त्वचा की सुरक्षा: धूप वाला चश्मा पहनें, त्वचा और बालों पर पहले से तेल लगाएं।
- भीड़ में: बच्चों और बुज़ुर्गों को भीड़ के बीच न ले जाएं। समूह में जाएं और मिलने की एक जगह पहले से तय करें।
- ट्रैफिक: गेर के दिन पुराने शहर में कई रास्ते बंद या डायवर्ट रहते हैं। पुलिस की ओर से जारी रूट प्लान देखकर निकलें।
- स्वच्छता: इंदौर नगर निगम गेर के तुरंत बाद सड़कों की सफ़ाई करता है, फिर भी पॉलीथिन और कचरा सड़क पर न फेंकें।
कहाँ से देखें
राजवाड़ा, उसके आसपास के बाज़ार और पुराने इंदौर की मुख्य सड़कें गेर देखने की सबसे लोकप्रिय जगहें हैं। भीड़ से बचते हुए देखना हो तो किसी परिचित की छत सबसे अच्छी जगह है।
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