इंदौर को अगर “खाने वालों का शहर” कहा जाता है, तो उसकी सबसे बड़ी वजह है सराफा बाज़ार। राजवाड़ा के पास बसा यह इलाका दिन में सोने-चांदी के गहनों का बाज़ार होता है, लेकिन रात होते ही जब ज्वेलरी की दुकानें बंद होती हैं, उन्हीं के सामने खाने के ठेले और काउंटर सज जाते हैं। देर रात तक यहाँ इंदौरी स्वाद का मेला लगा रहता है।
सराफा में क्या ज़रूर खाएं
- भुट्टे का कीस: कद्दूकस किए हुए मक्के को दूध, घी और हल्के मसालों के साथ पकाकर बनाया जाता है। यह इंदौर की अपनी पहचान वाली डिश है।
- गराडू: तला हुआ जिमीकंद, ऊपर से खास मसाला और नींबू। यह सर्दियों में ज़्यादा मिलता है।
- दही बड़ा: सराफा की दही बड़े की दुकानें अपने अंदाज़ के लिए भी मशहूर हैं, जहाँ प्लेट हवा में उछालकर परोसी जाती है।
- साबूदाने की खिचड़ी: मूंगफली, नींबू और सेव के साथ, इंदौरी स्टाइल में।
- खोपरा पैटीस: आलू के अंदर नारियल और मेवे की भरावन वाली कुरकुरी पैटीस।
- मीठे में: मालपुआ-रबड़ी, गुलाब जामुन, बड़ी जलेबी (जलेबा), कुल्फी और शिकंजी।
कब जाएं
सराफा की असली रौनक रात करीब 9 से 10 बजे के बाद शुरू होती है और देर रात तक चलती है। जल्दी पहुँचेंगे तो कई दुकानें अभी लग रही होंगी। शनिवार, रविवार और त्योहारों पर भीड़ बहुत ज़्यादा होती है, इसलिए आराम से खाना हो तो हफ्ते के बीच के दिन चुनें।
पहुँचने और घूमने के टिप्स
- सराफा की गलियाँ संकरी हैं, इसलिए गाड़ी राजवाड़ा या आसपास की पार्किंग में छोड़कर पैदल जाना बेहतर है।
- ज़्यादातर दुकानों पर UPI चलता है, फिर भी थोड़ा कैश साथ रखें।
- सब कुछ एक ही जगह न खाएं। छोटे-छोटे हिस्से लेकर कई चीज़ें चखें, यही सराफा घूमने का तरीका है।
- बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ जा रहे हैं तो भीड़ वाले समय से थोड़ा पहले पहुँचें।
आसपास और क्या देखें
सराफा से राजवाड़ा पैदल दूरी पर है, इसलिए रात के खाने से पहले राजवाड़ा की रोशनी देखना अच्छा प्लान है। दिन में खाने का मन हो तो इंदौर की दूसरी मशहूर फ़ूड स्ट्रीट 56 दुकान भी जा सकते हैं।
दुकानों के खुलने का समय और मेन्यू मौसम व त्योहारों के हिसाब से बदल सकते हैं।
