इंदौर में किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले बड़ी संख्या में लोग खजराना गणेश के दर्शन करने जाते हैं। शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित यह मंदिर इंदौर ही नहीं, पूरे मालवा के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है।
मंदिर का इतिहास
मान्यता है कि खजराना गणेश की प्रतिमा एक कुएँ से निकाली गई थी। कहा जाता है कि एक स्थानीय पुजारी को स्वप्न में इसकी जानकारी मिली थी। इसके बाद सन् 1735 में होलकर राजवंश की देवी अहिल्याबाई होलकर ने यहाँ मंदिर का निर्माण करवाया। समय के साथ मंदिर परिसर का विस्तार होता गया और आज यहाँ गणेश जी के मुख्य मंदिर के साथ कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।
उल्टे स्वस्तिक की परंपरा
खजराना गणेश मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता है उल्टा स्वस्तिक। श्रद्धालु अपनी मनोकामना के साथ मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर लौटकर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं। कई लोग नई गाड़ी, नए घर या शादी के बाद भी यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
कब जाएं
- बुधवार को गणेश जी का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन भीड़ सबसे ज़्यादा रहती है।
- गणेश चतुर्थी और नए साल पर यहाँ लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। ऐसे दिनों में दर्शन में काफ़ी समय लग सकता है।
- आराम से दर्शन करने हों तो सुबह जल्दी या दोपहर का समय चुनें।
दर्शन के लिए ज़रूरी बातें
- मंदिर के बाहर प्रसाद, फूल और लड्डू की कई दुकानें हैं।
- त्योहारों पर पुलिस और मंदिर प्रबंधन की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था बदली जाती है, इसलिए निकलने से पहले जानकारी ले लें।
- मंदिर परिसर में मोबाइल और जूते-चप्पल रखने की व्यवस्था रहती है।
- परिसर को साफ़ रखें; इंदौर अपनी स्वच्छता के लिए जाना जाता है।
आसपास और क्या
अगर आप इंदौर के इतिहास में रुचि रखते हैं, तो होलकर राजवंश के महल राजवाड़ा की कहानी भी ज़रूर पढ़ें।
दर्शन का समय और व्यवस्थाएं त्योहारों पर बदल सकती हैं। ताज़ा जानकारी के लिए मंदिर प्रबंधन से संपर्क करें।
