इंदौर की पहचान से जुड़ी अगर कोई एक इमारत है, तो वह है राजवाड़ा। पुराने शहर के बीचोंबीच खड़ा यह विशाल महल लगभग तीन सदियों से इंदौर के उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है। आज भी शहर के बड़े उत्सव, चाहे रंगपंचमी की गेर हो या कोई जीत का जश्न, राजवाड़ा के सामने ही मनाए जाते हैं।

किसने बनवाया

राजवाड़ा का निर्माण होलकर राजवंश के संस्थापक मल्हारराव होलकर के समय, अठारहवीं सदी के मध्य में शुरू हुआ। यह होलकर शासकों का निवास और शासन का केंद्र रहा। बाद में देवी अहिल्याबाई होलकर के समय इंदौर एक व्यवस्थित व्यापारिक शहर के रूप में विकसित हुआ।

बनावट की ख़ासियत

  • राजवाड़ा का मुख्य हिस्सा सात मंज़िला है। नीचे की मंज़िलें पत्थर की और ऊपर की मंज़िलें लकड़ी की बनी हैं।
  • इसकी शैली में मराठा, मुग़ल और यूरोपीय वास्तुकला का मेल दिखता है।
  • विशाल लकड़ी का मुख्य द्वार, झरोखे और भीतरी आँगन इसकी पहचान हैं।

आग और पुनर्निर्माण

अपने लंबे इतिहास में राजवाड़ा कई बार आग की चपेट में आया। 1984 में लगी आग से इसे भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद अलग-अलग समय पर इसका जीर्णोद्धार किया गया, और हाल के वर्षों में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इसे मूल स्वरूप के करीब लाने का काम हुआ।

आसपास क्या देखें

  • अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा: राजवाड़ा के सामने बने उद्यान में।
  • कृष्णपुरा की छतरियां: होलकर शासकों की स्मृति में बनी सुंदर छतरियां, पास ही खान नदी के किनारे।
  • गोपाल मंदिर: राजवाड़ा के पास स्थित पुराना मंदिर।
  • सराफा बाज़ार: रात के खाने के लिए पैदल दूरी पर। पढ़ें सराफा की हमारी गाइड।

घूमने के टिप्स

  • पुराने इंदौर की गलियों में ट्रैफिक ज़्यादा रहता है; पार्किंग के बाद पैदल घूमना सबसे आसान है।
  • शाम के समय राजवाड़ा की रोशनी देखने लायक होती है।
  • अंदर जाने का समय और टिकट से जुड़ी जानकारी बदलती रहती है, इसलिए जाने से पहले पता कर लें।

राजवाड़ा से जुड़ी इंदौर की सबसे रंगीन परंपरा के बारे में पढ़ें: रंगपंचमी की गेर।